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१०८ उपनिषदे कोणती आहेत?
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उपनिषदांपैकीं प्रमुख उपनिषदे १०८ आहेत ती अशी :-
१ ईशावास्य, २ केन, ३ कठ, ४ प्रश्न, ५ मुण्ड, ६ माण्डुक्य, ७ तैत्तिरीय, ८ ऐतरेय, ९ छांदोग्य, १० बृहदारण्य, ११ ब्रम्ह, १२ कैवल्य, १३ जाबाल, १४ श्वेताश्वेतर, १५ हंस, १६ आरुणि, १७ गर्म, १८ नारायण, १९ परम, (हंस) २० (अमृत) बिंदु, २१ (अमृत) नाद, २२ (अथर्व) शिरस्. २३ (अथर्व) शिखा, २४ मैत्रायिणी, २५ कौषीतकी, २६ बृहज्जाबाल, २७ नृसिंहतापिनी, २८ कालाग्निरुद्र, २९ मैत्रेयी, ३० सुबाल, ३१ क्षुरि (का) ३२ मन्त्रिका, ३३ सर्वसार, ३४ निरालंब, ३५ शुक (रहस्य), ३६ वज्रसूचिका, ३७ तेजो - (बिन्दु), ३८ नाद - (बिन्दु ३९ ध्यान-बिन्दु, ४० ब्रह्मविद्या, ४१ योगतत्त्व, ४२ आत्मबोधक, ४३ (नारद)- परिव्राजक, ४४ त्रिशिखि - (ब्राह्मण) ४५ सीता, ४६ (योग) चूडा - (मणि), ४७ निर्वाण, ४८ मण्डल- (ब्राह्मण) ४९ दक्षिणा - (मूर्ती) ५० शरम, ५१ स्कंद, ५२ महानारायण, ५३ अद्वय - (तारक) ५४ राम - (रहस्य) ५५ रामतपन, ५६ वासुदेव, ५७ मुद्गल, ५८ शाण्डिल्य, ५९ पिङ्गल, ६० भिक्षुक, ६१ महा, ६२ शारीरक, ६३ (योग)- शिखा, ६४ तुर्यातीत, ६५ संन्यास, ६६ (परमहंस)- परिव्राजक, ६७ अक्षमालिका, ६८ अव्यक्त, ६९ एकाक्षर, ७० (अन्न)- पूर्णा, ७१ सूर्य, ७२ अक्षिक, ७३ अध्यात्म, ७४ कुण्डिका, ७५ सावित्री, ७६ आत्म, ७७ पाशुपत, ७८ परव्रह्म, ७९ अवधूतक, ८० त्रिपूर तापन, ८१ देवी, ८२ त्रिपुर, ८३ कठ (रुद्र) ८४ भावना, ८५ रुद्र - (ह्रदय) ८६ (योग)- कुण्डली, ८७ भस्म - (जाबाल), ८८ रुद्राक्ष, ८९ गण - (पति) ९० (श्री जाबाल)- दर्शन, ९१ तारसार, ९२ महावाक्य, ९३ पञ्चब्रह्म, ९४ प्राण - (अग्निहोत्र), ९५ गोपाल (पूर्वतापिनी-उत्तरतापिनी), ९६ कृष्ण, ९७ याज्ञवल्क्य, ९८ वराह, ९९ शाठयानीय, १०० हयग्रीव, १०१ दत्तात्रेय, १०२ गरुड, १०३ कलि (संतराण), १०४ जाबालि, १०५ सौभाग्यलक्ष्मी, १०६ सरस्वती (रहस्या), १०७ बव्ह्रच आणि १०८ मुक्तिकोपनिषद. " अष्टोत्तरशतस्यादौ प्रामाण्यं मुख्यमीरितम. " (रा. गी. १८-३)
१ ईशावास्य, २ केन, ३ कठ, ४ प्रश्न, ५ मुण्ड, ६ माण्डुक्य, ७ तैत्तिरीय, ८ ऐतरेय, ९ छांदोग्य, १० बृहदारण्य, ११ ब्रम्ह, १२ कैवल्य, १३ जाबाल, १४ श्वेताश्वेतर, १५ हंस, १६ आरुणि, १७ गर्म, १८ नारायण, १९ परम, (हंस) २० (अमृत) बिंदु, २१ (अमृत) नाद, २२ (अथर्व) शिरस्. २३ (अथर्व) शिखा, २४ मैत्रायिणी, २५ कौषीतकी, २६ बृहज्जाबाल, २७ नृसिंहतापिनी, २८ कालाग्निरुद्र, २९ मैत्रेयी, ३० सुबाल, ३१ क्षुरि (का) ३२ मन्त्रिका, ३३ सर्वसार, ३४ निरालंब, ३५ शुक (रहस्य), ३६ वज्रसूचिका, ३७ तेजो - (बिन्दु), ३८ नाद - (बिन्दु ३९ ध्यान-बिन्दु, ४० ब्रह्मविद्या, ४१ योगतत्त्व, ४२ आत्मबोधक, ४३ (नारद)- परिव्राजक, ४४ त्रिशिखि - (ब्राह्मण) ४५ सीता, ४६ (योग) चूडा - (मणि), ४७ निर्वाण, ४८ मण्डल- (ब्राह्मण) ४९ दक्षिणा - (मूर्ती) ५० शरम, ५१ स्कंद, ५२ महानारायण, ५३ अद्वय - (तारक) ५४ राम - (रहस्य) ५५ रामतपन, ५६ वासुदेव, ५७ मुद्गल, ५८ शाण्डिल्य, ५९ पिङ्गल, ६० भिक्षुक, ६१ महा, ६२ शारीरक, ६३ (योग)- शिखा, ६४ तुर्यातीत, ६५ संन्यास, ६६ (परमहंस)- परिव्राजक, ६७ अक्षमालिका, ६८ अव्यक्त, ६९ एकाक्षर, ७० (अन्न)- पूर्णा, ७१ सूर्य, ७२ अक्षिक, ७३ अध्यात्म, ७४ कुण्डिका, ७५ सावित्री, ७६ आत्म, ७७ पाशुपत, ७८ परव्रह्म, ७९ अवधूतक, ८० त्रिपूर तापन, ८१ देवी, ८२ त्रिपुर, ८३ कठ (रुद्र) ८४ भावना, ८५ रुद्र - (ह्रदय) ८६ (योग)- कुण्डली, ८७ भस्म - (जाबाल), ८८ रुद्राक्ष, ८९ गण - (पति) ९० (श्री जाबाल)- दर्शन, ९१ तारसार, ९२ महावाक्य, ९३ पञ्चब्रह्म, ९४ प्राण - (अग्निहोत्र), ९५ गोपाल (पूर्वतापिनी-उत्तरतापिनी), ९६ कृष्ण, ९७ याज्ञवल्क्य, ९८ वराह, ९९ शाठयानीय, १०० हयग्रीव, १०१ दत्तात्रेय, १०२ गरुड, १०३ कलि (संतराण), १०४ जाबालि, १०५ सौभाग्यलक्ष्मी, १०६ सरस्वती (रहस्या), १०७ बव्ह्रच आणि १०८ मुक्तिकोपनिषद. " अष्टोत्तरशतस्यादौ प्रामाण्यं मुख्यमीरितम. " (रा. गी. १८-३)
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108 उपनिषदांची नावे खालीलप्रमाणे आहेत:
- ईशोपनिषद
- केन उपनिषद
- कठोपनिषद
- प्रश्न उपनिषद
- मुंडक उपनिषद
- मांडूक्य उपनिषद
- तैत्तिरीय उपनिषद
- ऐतरेय उपनिषद
- चांदोग्य उपनिषद
- बृहदारण्यक उपनिषद
- कौषीतकी उपनिषद
- जाबाल उपनिषद
- श्वेताश्वतर उपनिषद
- हंस उपनिषद
- आरुणेय उपनिषद
- गर्भ उपनिषद
- मैत्रेय उपनिषद
- कौषल उपनिषद
- नारायण उपनिषद
- अमृतबिंदु उपनिषद
- अमृतनाद उपनिषद
- अथर्वशिर उपनिषद
- अथर्वशिखा उपनिषद
- मैत्रायणी उपनिषद
- कलावती उपनिषद
- क्षुरिका उपनिषद
- मंत्रिका उपनिषद
- सर्वसार उपनिषद
- निरालंब उपनिषद
- शुक रहस्य उपनिषद
- वज्रसूची उपनिषद
- आत्मबोध उपनिषद
- स्कंद उपनिषद
- योगतत्त्व उपनिषद
- देव्युपनिषद
- त्रिशिखी ब्राह्मण उपनिषद
- सीता उपनिषद
- योगचूडामणि उपनिषद
- निर्वाण उपनिषद
- मंडल ब्राह्मण उपनिषद
- दक्षिणामूर्ति उपनिषद
- शरभ उपनिषद
- अद्वैत तारक उपनिषद
- राम रहस्य उपनिषद
- पंचब्रह्म उपनिषद
- प्राणाग्निहोत्र उपनिषद
- मुक्तिका उपनिषद
- सूर्य उपनिषद
- अक्षमालिक उपनिषद
- अन्नपूर्णा उपनिषद
- एक अक्षर उपनिषद
- गरुड उपनिषद
- कालिसंतरण उपनिषद
- कैवल्य उपनिषद
- जाबालदर्शन उपनिषद
- तारासार उपनिषद
- अध्यात्म उपनिषद
- कुंडिका उपनिषद
- सावित्री उपनिषद
- आत्मोपनिषद
- पाशुपत उपनिषद
- परब्रह्म उपनिषद
- अवधूत उपनिषद
- त्रिपुरातापिन्युपनिषद
- देवी उपनिषद
- त्रिपुरा उपनिषद
- कठरुद्र उपनिषद
- भावृच उपनिषद
- रुद्रहृदय उपनिषद
- योगकुंडली उपनिषद
- भस्म जाबाल उपनिषद
- गणपति उपनिषद
- नृसिंहतापनीय उपनिषद
- कालाग्निरुद्र उपनिषद
- दत्तत्रेय उपनिषद
- रामतापणी उपनिषद
- तारकोपनिषद
- अमृतमहोपनिषद
- वज्रसुचीकोपनिषद
- तेजोबिंदु उपनिषद
- ध्यानबिंदु उपनिषद
- नादबिंदु उपनिषद
- शैव उपनिषद
- षट् चक्र उपनिषद
- हठयोग प्रदीपिका
- अद्वैत उपनिषद
- अनुभवसार उपनिषद
- अग्निहोत्र उपनिषद
- आपस्तंब उपनिषद
- अथर्वण उपनिषद
- अवधूत उपनिषद
- बृहज्जाबाल उपनिषद
- चुलिका उपनिषद
- गणपति उपनिषद
- जाबाल उपनिषद
- महात्मा उपनिषद
- मैत्रेय उपनिषद
- मांडूक्य उपनिषद
- मुक्तिका उपनिषद
- निरुक्त उपनिषद
- पैंगला उपनिषद
- राम उपनिषद
- शारीरिक उपनिषद
- शुक रहस्य उपनिषद
- सूर्य उपनिषद
- तारक उपनिषद
- त्रिपुरा उपनिषद
- वराह उपनिषद
- योग-शिखा उपनिषद
हे सर्व उपनिषदांचे मिळून हिंदू धर्मातील एक महत्त्वाचा भाग आहे.