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आये कुछ अब्र ही कथा कोणाची आहे?
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ही कथा नसुन ही एक गझल आहे... फ़ैज़ अहमद फ़ैज़ हे यांनी ही गझल लिहिली आहे
आए कुछ अब्र कुछ शराब आए
इस के बा'द आए जो अज़ाब आए
बाम-ए-मीना से माहताब उतरे
दस्त-ए-साक़ी में आफ़्ताब आए
हर रग-ए-ख़ूँ में फिर चराग़ाँ हो
सामने फिर वो बे-नक़ाब आए
उम्र के हर वरक़ पे दिल की नज़र
तेरी मेहर-ओ-वफ़ा के बाब आए
कर रहा था ग़म-ए-जहाँ का हिसाब
आज तुम याद बे-हिसाब आए
न गई तेरे ग़म की सरदारी
दिल में यूँ रोज़ इंक़लाब आए
जल उठे बज़्म-ए-ग़ैर के दर-ओ-बाम
जब भी हम ख़ानुमाँ-ख़राब आए
इस तरह अपनी ख़ामुशी गूँजी
गोया हर सम्त से जवाब आए
'फ़ैज़' थी राह सर-ब-सर मंज़िल
हम जहाँ पहुँचे कामयाब आए
- फ़ैज़ अहमद फ़ैज़
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'आये कुछ अब्र' ही गझल फैज अहमद फैज यांनी लिहिली आहे.
फैज अहमद फैज हे एक प्रसिद्ध पाकिस्तानी कवी होते. त्यांची शायरी (कविता) प्रेम, सामाजिक न्याय आणि राजकीय विषयांवर आधारित आहे.
'आये कुछ अब्र' या गझलेमध्ये त्यांनी विरह आणि आठवण (nostalgia) व्यक्त केली आहे.